शहीदों के नाम पर बनेगी गांव में सड़क: केशव प्रसाद मौर्य

जम्मू-कश्मीर – पुलवामा में पिछले साल आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को पीडब्लूडी के विश्वेश्वरैया हाल में शुक्रवार को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर यूपी के 13 शहीदों के परिवारीजनों को शॉल पहनाकर सम्मानित किया गया। शहीदों के माता-पिता और पत्नी को 11-11 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी दी गई। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शहीदों गांव की सड़क बनवाकर उनके नाम पर उसका नामकरण करने और शहीदों की प्रतिमा लगवाने का भी ऐलान किया है।

पुलवामा में पिछले साल 14 फरवरी को आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इसमें यूपी के भी 13 जवान शामिल थे। इन जवानों के परिवारीजन को पीडब्लूडी की ओर से शुक्रवार को सम्मानित किया गया। पीडब्लूडी, सेतु निगम और राजकीय निर्माण निगम के अफसरों से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने अपना एक दिन का वेतन शहीदों के नाम दान किया है। उसी रकम से शहीदों के माता-पिता और उनकी पत्नी व बच्चों को 11-11 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व अन्य अतिथियों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और दो मिनट का मौन भी रखा।

डिप्टी सीएम ने कहा कि शहीदों के माता-पिता और उनकी पत्नी व बच्चों को 11-11 लाख अलग-अलग इसलिए दिया गया है, ताकि बुजुर्गों को लाचारी व बेबसी का सामना न करना पड़े। जिन शहीदों का विवाह नहीं हुआ था, उनके माता-पिता व अन्य परिवारीजन को भी 22 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। इस मौके पर धनवंतरी सेवा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत, संघ प्रचारक अवधेश, व्यापारी कल्याण निगम के उपाध्यक्ष मनीष गुप्ता व धनवंतरी सेवा संस्थान के केंद्रीय परिषद सदस्य अशोक कुमार समेत अन्य लोग मौजूद थे।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 और 53ए हटाए जाने के बाद लोग स्वतंत्र महसूस कर रहे हैं। अब आतंकियों को छुपने के लिए ठिकाना नहीं मिल रहा है, इसलिए आतंकी घटनाएं भी कम हो गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना और सबसे ताकतवर नेता (पीएम नरेंद्र मोदी) भारत के पास है।

विपक्ष के एक नेता ने ट्वीट कर कहा है कि पुलवामा आतंकी हमले से सबसे ज्यादा फायदा किसको हुआ? इस पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुझे ऐसे नेता को भारतीय कहने पर शर्म आती है। जो लोग हमारी सेनाओं के जवानों की मंशा और उनके बलिदान पर सवाल उठाते हैं, उनकी मैं घोर निंदा करता हूं।

शामली जिले के निवासी शहीद अमित कुमार, शहीद प्रदीप कुमार, प्रयागराज के शहीद महेश यादव, महराजगंज के शहीद पंकज त्रिपाठी, कन्नौज के शहीद प्रदीप सिंह यादव, मैनपुरी के शहीद राम वकील माथुर, चंदौली के शहीद अवधेश यादव, देवरिया के शहीद विजय मौर्य, आगरा के शहीद कौशल रावत, कानपुर देहात के शहीद रोहित यादव, वाराणसी के शहीद रमेश यादव और कानपुर देहात के शहीद रोहित यादव।

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