शिक्षक दिवस पर हुआ शिक्षकों का सम्मान

सहार। “शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन उसे बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें।” ऐसा कहने वाले स्वतंत्र भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुवनी गांव में हुआ था। एक बार उनके कुछ विद्यार्थी और दोस्तों ने उनके जन्मदिन को सेलिब्रेट करने का मन बनाया। इस पर डॉ सर्वपल्ली ने कहा कि मेरा जन्मदिन अलग से मनाने के बजाए अगर इसे शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो मुझे गर्व महसूस होगा। इसके बाद साल 1965 में डॉ.एस.राधाकृष्णन के कुछ छात्रों ने उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुए एक सभा का आयोजन किया। इसी आयोजन में उन्होंने अपने भाषण में कहा कि उनकी जयंती को भारत और बांग्लादेश के अन्य महान शिक्षकों को श्रद्धाजंलि देकर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए। उसी के बाद से साल 1967 से ही 5 सितंबर को पूरा देश डॉ.एस.राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाता है।

इसी के तहत विद्यालय में भी सादगी और उत्साह से शिक्षक दिवस मनाया गया। भौतिकी प्रवक्ता रामेन्द्र सिंह कुशवाहा ने प्राथमिक संवर्ग में कार्यरत अंशकालिक महिला शिक्षिकाओं कोमल भदौरिया, राखी एवं रुप कुमारी को गिफ्ट देकर सम्मानित किया। उनका कहना है कि बच्चों की नींव को मजबूत आधार देने में इन शिक्षिकाओं की मेहनत, लगन और समर्पण को हम नमन करते हैं। इस अवसर पर हर क्लास के बच्चों ने अपने गुरुजनों को पेन गिफ्ट किए। प्रधानाचार्य किशोर कुमार सहित भौतिकी प्रवक्ता रामेन्द्र सिंह कुशवाहा, हरेंद्र यादव, दीपनारायण, विपुल कुमार, राजेश अवस्थी, सरफराज अहमद, ममता शुक्ला, निर्मला झा, दुर्गेश नंदिनी आदि शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।क एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

रिपोर्ट
सुनील कुमार

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