खुलेआम काटे जा रहे हैं हरे पेड़

भेलसर , अयोध्या – दैवीय आपदाओं एवं विभीषिकाओं से बचाने के लिए वनों का संरक्षण तथा पेड़-पौधे लगाने के लिए सरकारें प्रयास कर रही हैं लेकिन पेड़ों की कटाई को रोकना बड़ा मुश्किल लग रहा है।ट्रैक्टर-ट्राली पर लादकर लकड़ी को आरा मशीनों पर पहुंचाया जा रहा है और क्षेत्रीय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है क्षेत्र के हरे भरे पेड़ कट जाते हैं और वन विभाग तथा पुलिस को भनक तक नही लग पाती है।पेड़ कटाई का ऐसा ही एक ताजा मामला प्रकाश में आया है। मवई थाना क्षेत्र के बरतरा गांव के समीप ईदगाह में चार हरे पेड़ो को वन माफियाओं ने दिन दहाड़े ही काट लिया।जिसमे दो पेड़ नीम व दो पेड़ महुआ के थे।जिसका पुलिस व वन विभाग को पता ही नही चल सका।जब सारी लकड़ी चली गई महज कुछ ही लकड़ी बची तो वन विभाग के कर्मचारियों ने पहुँच कर ठेकेदार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने की बात कही।बाद में ठेकेदार से महज जुर्माना भरा कर मामले को रफा दफा कर दिया गया और कार्यवाई के नाम पर महज औपचारिकता पूरी की गई।

ऐसा नहीं है कि पुलिस व वन विभाग अनजान है।सूत्रों के मुताबिक लकड़ी माफिया पुलिस एवं विभागीय कर्मचारी से मिल-जुलकर हरे पेड़ की कटाई के खेल में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।अगर यही हालात रहे तो क्षेत्र हरे भरे पेड़ों से खाली हो जाएगा जबकि पर्यावरण को संतुलित रखने के लिये पेड़-पौधों का होना अति आवश्यक है।उसके लिये सरकार द्वारा बड़े-बड़े स्लोगन लिखवाए जाते हैं प्रचार-प्रसार किया जाता है।पौधे लगाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे है पर सच यह है कि पेड़ तो कम लगते हैं अलबत्ता उनकी कटाई जोरों पर हो जाती है।हरे पेड़-पौधों की कटाई से अवैध कमाई तो लकड़ी माफियाओं के साथ साथ पुलिस एवं वन विभाग को होती है।सूत्र बताते है कि पुलिस लकड़ी माफियाओं से प्रति पेड़ मोटी रकम वसूलती है।जिस तरह से क्षेत्र में हरे पेड़ों की कटाई हो रही है इसके भयावह परिणाम से आम आदमी की जिंदगी को भारी खतरा है।पेड़ों की कटाई के कारण अवर्षण,बाढ़ जैसी आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है।वहीं किसान सूखे की चपेट में आकर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

रिपोर्ट – अब्दुल जब्बार ,  विकास वीर यादव

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