पराली जलाने पर 14 किसानों पर हुई एफआईआर

औरैया। एनजीटी और प्रदेश सरकार के द्वारा पराली जलाने को लेकर दिए गए सख्त निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रशासन द्वारा पराली जलाने वाले किसानों एवं पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश न लगा पाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर भारी कार्रवाई की गई है।

वातावरण में फैल रहे प्रदूषण के दृष्टिगत जनपद में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए तहसीलवार सघन निगरानी की जा रही है। सैटेलाइट सर्वे और स्थलीय जांच के आधार पर जनपद के 273 किसानों को कृषि विभाग ने नोटिस जारी किए हैं। जबकि इनमें से 14 किसानों पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई है और 236 किसानों पर कुल 5 लाख 90 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 20 किसानों से 50 हजार रूपये की वसूली भी की चुकी है। बाकी किसानों से वसूली की कार्रवाई तहसीलकर्मियों द्वारा की जा रही है।

वही पराली जलाने से रोकने में नाकाम रहने वाले एक लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है जबकि 15 लेखपाल एवं 11 प्राविधिक सहायक कृषि को प्रतिकूल चरित्र प्रविष्टि दी गई। साथ ही 32 लेखपाल और 11 पुलिस चौकी प्रभारियों को चेतावनी जारी की गई है। लापरवाही बरतने पर एसडीएम बिधूना से पांच हजार रूपये अर्थदण्ड वसूली का नोटिस जारी किया गया है। पराली जलाये जाने की 14 घटनाओं में प्रति घटना पांच हजार रूपये की दर से संबंधित पुलिस चौकी/थाना प्रभारी, ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, प्राविधिक सहायक, कानूनगो, लेखपाल पर बराबर बराबर अर्थदंड आरोपित करते हुए कुल 70 हजार रूपये की वसूली का नोटिस जारी किया गया है।

सैटेलाइट से पकड़े गयी 59 घटनायें

भारत सरकार द्वारा पराली जलाने की घटनाओं का समय-समय पर सैटेलाइट के माध्यम से सर्वे कराया जाता है। इस सैटेलाइट सर्वे में जनपद में पराली जलाने की लगभग 59 घटनाओं को चिन्हित किया गया। जिसमें सम्बन्धित किसान और कर्मचारी पर जुर्माना लगाया गया है।

आने वाले समय में कम होंगी पराली जलाने की घटनाएं

उपकृषि निदेशक विजय कुमार ने बताया है कि जनपद की कृषि भूमि पर अब अधिकांशत: गेहूं बुवाई का काम शुरु हो गया है, लिहाजा खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर आने वाले समय में काफी कमी आ जाएगी।

जिलाधिकारी द्वारा किसानों से पराली न जलाने की अपील की गयी

जिलाधिकारी ने कहा कि एनजीटी और प्रदेश सरकार के निर्देशों का पालन सख्ती से कराया जा रहा है जो किसान पराली जलाते हुए पकड़े जा रहे हैं उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे पराली को ना जलाएं। पराली में आग लगाने से भूमि की उर्वरता खत्म होती है और प्रकृति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। मनुष्य व अन्य जीव जंतुओं के साथ पेड़-पौधों में भी जीवन होता है। पराली जलाने से खेती के लिए उपयोगी कीट नष्ट हो जाते हैं। पराली को कूटकर जुताई करने और पानी देने से वह खेत में कंपोस्ट का काम करती है।

रिपोर्ट
सुनील कुमार

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