पशु आश्रय गृह किसानों के लिए बना छलावा

अयोध्या। थाना मवई अंतर्गत अमराई गांव व लोहरास पुरवा के मध्य मवेशियों के लिए पशु आश्रय गृह शासन की मंशा के अनुरूप प्रशासन के निर्देशानुसार संबंधित ग्राम प्रधान पारा पहाड़पुर द्वारा निर्माण कराया गया जिसमें समस्त नियम कानून ताक पर रखकर सरकारी मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए मानक के विपरीत निर्माण कार्य कराया गया। पशु आश्रय गृह (गोशाला) का निर्माण लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व कराया गया था जो मौजूदा समय सफेद हाथी बन कर रह गया है। शुरुआती दौर में क्षेत्र के सभी दिशाओं से छुट्टा मवेशियों को पकड़- पकड़ कर ग्रामीणों व किसानों द्वारा लाकर पशु आश्रय गृह में कैद कराया गया। उस समय पशुओं की अच्छी खासी संख्या थी परंतु वर्तमान समय वही संख्या घटकर आधी भी नहीं बची आखिर यह छुट्टा पशु कहां गए कितने गोवंश पशु आश्रय गृह से पुनः बाहर भाग गए कितने छुट्टा पशुओं की मृत्यु हो गई कितने गोवंश को ग्रामीणों में पालने के लिए दिया गया। इसकी जानकारी पशु आश्रय गृह से नहीं प्राप्त हो सकी।

ज्ञातव्य हो कि पखवाड़े भर पूर्व पशु आश्रय गृह पारा पहाड़पुर में निरंतर बारिश के दौरान व गौशाला में व्याप्त अनियमितताओं,उचित रख रखाव के अभाव तथा तैनात कर्मियों की लापरवाही व ढुलमुल नीति के चलते,इधर-उधर भागते भूखे ,प्यासे, भीगते गोवंश की हालत बिगड़ती चली गई। जिन को काल ने अपना ग्रास बना लिया। घटना की सूचना पाकर जिले से मुख्य विकास अधिकारी व डीसी मनरेगा अपने टीम के साथ पारा पहाड़पुर गौशाला पहुंचकर पशुओं के मरने के कारण की विधिवत जांच कर स्थलीय निरीक्षण उपरांत बीमार पशुओं का त्वरित उपचार करने हेतु पशुचिकित्सा की टीम को निर्देशित किया परंतु पखवारा भर बीत जाने के बाद भी गौशाला की हालत में विधिवत सुधार नहीं हो सका। लापरवाही व अव्यवस्थाओं का अंबार कभी भी देखा जा सकता है। बताते चलें कि पारा पहाड़पुर गौशाला में गोवंश की पिछले तीन-चार माह से 350 की संख्या बताई जा रही है जबकि बीच-बीच में छुट्टा मवेशियों को ग्रामीणों किसानों द्वारा पकड़ कर उक्त गौशाला पशु आश्रय केंद्र में कैद कराया जाता है तो इसकी तादाद में इजाफा क्यों नहीं होता। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि पशुओं के खाने हेतु चारा, भूसा, चलोना, पशु आहार दूसरे दिन तीसरे दिन कम से कम एक ट्राली अधिकतम दो ट्राली जिले से पारा पहाड़पुर पशु आश्रय गृह आता है। जब यहां पशुओं की तादाद दिनोंदिन कम हो रही है तो इतने मात्रा में भूसा पशु आहार की क्या आवश्यकता है? आखिर यह पशुओं का आहार कहां जाता है ?इतनी तादाद में आहार की व्यवस्था के बावजूद भी गौशाला में कैद गायों (गोवंश) की हालत वही ढाक के तीन पात जैसी है। जो भुखमरी के कगार पर पहुंच रहे हैं बताते चलें कि ग्रामीणों को प्रत्येक गाय पालने पर 30 रु प्रतिदिन के हिसाब से खुराकी देकर गौशाला से गाय ले जाकर अपने घर पालने हेतु दिए जाने की व्यवस्था बनाई गई है। परंतु संबंधित कर्मियों द्वारा इसमें भी गोरखधंधा का कार्य किए जाने की चर्चा चर्चित है। अभिलेखों में भले सब कुछ सही दर्शाया गया हो परंतु मौके पर वास्तविकता कुछ और नजर आ रही है जबकि छुट्टा जानवरों का आज भी क्षेत्र में आतंक व्याप्त है। जिन्हें सार्वजनिक स्थलों चौराहों गांव की गलियों में झुंड के झुंड कभी भी देखा जा सकता है। छुट्टा घुमंतू मवेशियों को एकत्र कर गौशाला पशु आश्रय केंद्र में रखे जाने की शासन की मंशा वह निर्देश क्षेत्र के पारा पहाड़पुर स्थित पशु आश्रय गृह के लिए बेअसर साबित हो रहा है।

रिपोर्ट
हिमांशु श्रीवास्तव

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