संस्कृत और सभ्यता की परिभाषा भूलता जा रहा समाज: प्रो रजनीश शुक्ल

कुशीनगर। विद्या ज्ञान को जीतने का साधन है। विद्या वह है जो अमरत्व प्रदान करती है। आज हम आत्मबोध को दरकिनार कर अपनी पहचान बनाने में लगे हैं। विकास के बाद भी समाज सभ्यता की परिभाषा नहीं कर सका। उक्त बातें स्थानीय श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय के 95 वें स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार को मुख्य अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति प्रो रजनीश कुमार शुक्ल ने अपने संबोधन में कहीं।

उन्होनें कहा कि भारत की सभी भाषाओं पर अंग्रेजी, फारसी, अरबी आदि विदेशी भाषाओं का आक्रमण जारी है। भारत की किसी भी भाषा को शुद्ध बोलना अधिकांश लोगों के लिए असंभव हो जाएगा। इस संकट का एक कारण शिक्षा समाज की एक पीढ़ी द्वारा अपने से निचली पीढ़ी को अपने ज्ञान के हस्तांतरण का प्रयास है। इस विचार से शिक्षा एक संस्था के रूप में काम करती है जो व्यक्ति विशेष को समाज से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा समाज की संस्कृति की निरंतरता को बनाए रखती है। इस अवसर पर मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष मुरली मनोहर पाठक ने कहा कि हम अपने नैतिक मूल्यों से दूर भाग रहे हैं। जब हम मूल से गिरते हैं तो हम संस्कृत से गिरते हैं। शिक्षा द्वारा समाज के आधारभूत नियमों व्यवस्थाओं समाज के प्रतिमानों एवं मूल्यों को सिखाता है। हम समाज से तभी जुड़ पाते हैं जब वह उस समाज विशेष के इतिहास में अभिमुख होता है। कार्यक्रम को दीप्ति त्रिपाठी डॉक्टर वशिष्ठ त्रिपाठी ने भी संबोधित किया।

महाविद्यालय के स्थापना दिवस के अवसर पर शोध पत्रिका ज्योती एवं त्रिलोकीनाथ चंचरीक के द्वारा रचित पुस्तक झांपी का भी विमोचन हुआ। कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों को महाविद्यालय के प्रबंधक अग्निवेश मणि एवं मंत्री गंगेश्वर पांडे ने प्रशस्ति पत्र अंग वस्त्र एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित द्वारकाधीश संस्कृत एकेडमी गुजरात के पूर्व निदेशक प्रो जयप्रकाश नारायण द्विवेदी ने किया व संचालन डॉक्टर प्रभाकर मिश्र ने किया। इस अवसर पर स्थानीय विद्यायक पवन केडिया शिक्षक संघ के विधायक ध्रुव त्रिपाठी, डा जगदीश पाण्डेय, प्राचार्य राजेश चतुर्वेदी, नपाध्यक्ष मोहन वर्मा, प्रो संतोष कुमार शुक्ला, प्रो रमेश द्विवेदी, राममूर्ति चतुर्वेदी, राजेश मणि, गौरव त्रिपाठी, ओम प्रकाश द्विवेदी, डॉ सतीश शुक्ला।

रिपोर्ट
उपेन्द्र तिवारी

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