योगी सरकार के निशाने पर आए ये सरकारी कर्मचारी, जल्द जा सकती है नौकरी; जानिए क्या है मामला

यूपी की योगी सरकार ने परीक्षाओं में धांधली कर सरकारी नौकरी पाने वाले कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की पूरी तैयारी कर ली है. परीक्षा में सॉल्वर बैठाकर सरकारी नौकरी पाने वाले आगरा के 30 कर्मचारी पुलिस के निशाने पर हैं. एक सॉल्वर गिरोह से पूछताछ में इन लोगों के नाम सामने आए हैं और इससे संबंधित सुराग मिले हैं. जिन लोगों ने फर्जी तरीके से नौकरी पाई है वे पुलिस, शिक्षा विभाग में तैनात हैं और एक आरोपित न्याय विभाग में भी है. इन सभी के परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था से प्रवेश पत्र निकलवाए जा रहे हैं.

ये मामला तब पकड़ में आया जब सुपर टेट की परीक्षा में एसओजी ने आवास विकास कालोनी स्थित शिवालिक कैंब्रिज स्कूल से भूपेश बघेल नाम के सॉल्वर को पकड़ा था. ये शख्स फिरोजाबाद के भुवनेश्वर राणा की जगह परीक्षा देने आया था. फिरोजाबाद में तैनात सहायक अध्यापक वीनू सिंह ने भूपेश को परीक्षा देने भेजा था और चार लाख रुपये में ठेका लिया था. लोहामंडी पुलिस ने वीनू सिंह और भुवनेश्वर राणा को पकड़कर जेल भेजा था. अब इसी वीनू से पूछताछ हुई तो खुलासा हुआ कि उसकी जगह भी परीक्षा में सॉल्वर बैठा था और कई लोगों को टेट पास कराया. वीनू ने बताया कि पुलिस महकमे में कई सिपाही बन चुके हैं. उसने सॉल्वर मुहैया कराए थे जिनसे शिक्षा विभाग में भी उसके जरिए कई लोगों की नौकरी लगी है. इनमें से एक युवक न्याय विभाग में भी तैनात है. पुलिस ने पूछताछ के बाद ऐसे 30 सरकारी कर्मचारियों की एक लिस्ट बनाई है जिन्होंने फर्जी तरीके से नौकरी पाई है और अब इन पर कार्रवाई होनी तय है.

जेल गए थे दो सिपाही नौकरी छिन गई

वीनू ने पूछताछ में बताया था कि दो युवक सॉल्वरों की मदद से सिपाही बने थे. स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की आगरा यूनिट ने एक सॉल्वर को पकड़ा था उसके बाद इस फर्जीवाड़े की जानकारी हुई थी. दोनों सिपाहियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है. उनकी नौकरी जा चुकी है. इस मामले में भी पुलिस ने बताया कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था से रिकार्ड निकलवाया जाएगा. प्रवेश पत्र पर सॉल्वर का ही फोटो होगा, इस आधार पर यह साबित किया जाएगा कि नौकरी फर्जीवाड़े से पाई गई है. इसके बाद आरोपियों के नाम धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज किए जाएंगे.

पश्चिमी यूपी से चल रहा है सॉल्वर गैंग

कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा का सॉल्वर गैंग बिहार और पश्चिमी यूपी से संचालित हो रहा है. शनिवार को पकड़े गए सॉल्वरों से इसका खुलासा हुआ है. इनपुट मिलने के बाद एसटीएफ की टीमे बिहार पहुंच गयी हैं. लखनऊ की आशियाना पुलिस ने शनिवार को जिन पांच सॉल्वरों को गिरफ्तार किया उन्होंने बताया कि पटना में रहने वाले नीतीश ने उन्हें भेजा था. इसके लिए उन्हें 50-50 हजार रुपये एडवांस मिले थे, बाकी रुपये परीक्षा के बाद मिलने थे. उन्होंने बताया कि एक गिरोह अलीगढ़ से भी संचालित हो रहा है. लोकल पुलिस ने यह इनपुट जांच कर रही एसटीएफ की टीम को दिया है, इसपर एसटीएफ की टीमें बिहार और अलीगढ़ पहुची हैं.

पकड़े गए सॉल्वरों ने बताया कि परीक्षा में सॉल्वर हायर करने के लिए फॉर्म डालने से पहले ही डील हो जाती है. गैंग का सरगना ऐसे अभ्यर्थियों के बारे में पता लगाकर खुद उनसे संपर्क करता है जो आवेदन करने वाले होते हैं. पास करवाने की गारंटी के साथ 4-5 लाख रुपये में सौदा होता है. कम से कम चौथाई रकम मिलने पर आवेदन के समय ही फॉर्म में सॉल्वर की फोटो लगाई जाती है. इसके बाद अभ्यर्थी के नाम और पते से सॉल्वर का आधार कार्ड व अन्य पहचान पत्र बनवाया जाता है.

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