उत्तर प्रदेश की अंतिम विधानसभा सीट, जहां कभी नहीं खिला है बीजेपा का कमल

क्रम संख्या के हिसाब से सोनभद्र जिले की दुद्धी विधानसभा सीट प्रदेश की अंतिम सीट है. इसे 403 दुद्धी विधानसभा क्षेत्र भी कहा जाता है. 2012 में यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. लेकिन 2017 में इसे अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया गया था. सोनभद्र की ओबरा विधानसभा सीट भी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. सोनभद्र उत्तर प्रदेश में आदिवासियों की सबसे अधिक आबादी वाला जिला है. 

विधानसभा के लिए 1969, 1972 और 77 में हुए चुनाव में जनसंघ ने दुद्धी सीट पर जीत तो दर्ज की थी. लेकिन 1980 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के गठन के बाद से वो कभी भी इस सीट से जीत नहीं पाई है. हालांकि उसके गठबंधन सहयोगी को यहां से जीत मिली है.  आदिवासी बहुल इस विधानसभा क्षेत्र का सबसे अधिक समय तक प्रतिनिधित्व विजय सिंह गोंड ने किया है. वो कई पार्टियों में रह चुके हैं.

बीजेपी ने 2017 का विधानसभा का चुनाव अपना दल के साथ मिलकर लड़ा था. दुद्धी सीट अपना दल के खाते में गई थी. अपना दल ने वहां से हरिराम चेरो को टिकट दिया था. सीट पर उनका मुकाबला पूर्व विधायक और बसपा के उम्मीदवार विजय सिंह गोंड से था. कांटे की इस टक्कर में चेरो ने गोंड को 1085 वोटों से मात दी थी. चेरो को कुल 64 हजार 399 और गोंड को 63 हजार 314 वोट मिले थे. कांग्रेस के अनिल कुमार सिंह को 46 हजार 90 वोट मिले थे. 

दुद्धी विधानसभा में कुल 3 लाख 8 हजार 54 मतदाता हैं. साल 2017 के चुनाव में 1 लाख 96 हजार 6 सौ लोगों या 63.82 फीसद ने वोट डाला था.  पिछले विधानसभा चुनाव में दुद्धी सीट पर नोटा समेत कुल 9 उम्मीदवार मैदान में थे. इनमें कोई महिला उम्मीदवार शामिल नहीं थी. इनमें से 5 उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे. 

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