बाल सुधार गृहों में कोरोना फैलने को लेकर SC ने चार राज्‍यों से रिपोर्ट तलब की

सुप्रीम कोर्ट ने बाल सुधार गृहों में कोरोना संक्रमण फैलने के मामले को गंभीरता से लेते हुए वकील गौरव अग्रवाल को अमिक्स क्यूरी नियुक्त किया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और त्रिपुरा को शुक्रवार तक कानून के कोविड—19 मामलों को लेकर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

जस्टिस एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने आश्रय गृहों में कोविड—19 से बच्चों की सुरक्षा से संबंधित मामले की सुनवाई की। तमिलनाडु सरकार ने अदालत को बताया कि चेन्नई के रॉयपुरम में एक सरकारी आश्रय गृह में कोरोना पीड़ित 35 बच्चे ठीक हो गए हैं और अब वहां कोई भी संक्रमित नहीं है।

पिछली सुनवाई में तमिलनाडु में रायपुरम के एक प्रोटेक्शन होम में 35 बच्चों के कोराना पॉजिटिव होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए थे। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को इस मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। SC ने पूछा था कि अदालत के आदेश के बावजूद कोरोना पॉजिटिव क्यों हुआ, सावधानी क्यों नहीं बरती गई और क्या कार्रवाई की गई। राज्य के स्वास्थ्य सचिव से जवाब मांगा गया था। SC ने संस्थानों में बच्चों के संबंध में राज्य सरकारों से प्रतिक्रिया मांगी थी। कोर्ट ने कहा था कि हम एक प्रश्नावली राज्य सरकारों को भेज रहे हैं। HC की किशोर न्याय समितियां (JJC) प्रश्नावली का प्रसार करेंगी और डेटा प्राप्त करेंगी। JJC यह सुनिश्चित करेंगी कि राज्य सरकारें वह जानकारी प्रदान करें जो मांगी गई हैं।

इससे पहले अदालत ने देशभर के शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों के लिए स्वत: संज्ञान लिया था और केंद्र व राज्य सरकारों ने उठाए जाने वाले कदमों के बारे में जानकारी मांगी थी। कानपुर में शेल्टर होम में 57 नाबालिग लड़कियों के कोरोना पॉजिटिव होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए यूपी सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि सरकार इस मामले में हलफनामा दाखिल करे।

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