नशे की गिरफ्त में भारत का युवा

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में युवा वर्ग का अपना खास योगदान होता है।  युवाओं के मामले में भारत दुनिया का समृद्ध देश है। किसी भी देश का युवा उस देश की कल की आशा है  और वह देश के सबसे ऊर्जावान महत्वकांक्षी भाग में से एक होता है। युवा वर्ग से बहुत उम्मीद है क्योंकि देश के युवा वर्ग को देश का भविष्य कहा गया है। राष्ट्र के विकास में युवाओं का अहम योगदान है।

कुछ सालों के आँकड़े देखे जायें तो बीते सालों में युवाओ की कार्य पर प्रतिकूल असर पड़ा है। खास कर मेट्रो शहरों में काम करने वाले युवा तनाव, अनिद्रा, डायबटीज़ और मोटापा का शिकार पाए गए हैं। जिसकी वजह अनियमित दिनचर्या, शराब, स्मोकिंग और खराब खान-पान है।युवाओं के स्वास्थ्य पर जो सबसे बुरा प्रभाव पड़ा है, वह है नशा।  नशा भारत के लिए तेजी से चिंता का विषय बनता जा रहा है।  सबसे ज्यादा नशे की चपेट में भारत का भविष्य कहे जाने वाला युवा वर्ग है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार पश्चिम बंगाल नशे के मामले में सबसे आगे है।

नशा अब सिर्फ पुरुषों तक नहीं सीमित है। बल्कि महिलाओं की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। नारीवाद और समानता के नाम पर महिलाएं नशे के ओर बढ़ती जा रही  है।  समानता अधिकारों, विचारों, प्रतिभाओं की होती है किन्तु महिलाओं ने इसे नशे से भी जोड़ दिया है।

युवाओं में नशे की लत अपराध को जन्म देती है।  समाज में फैली नशे की बुराई न केवल युवाओं के शरीर को खोखला कर उनके भविष्य को अंधकार में धकेल रही है, बल्कि अपराध का ग्राफ भी बढ़ा रही है। नशे की लत इतनी गहरी होती चली जाती है कि उसके ना मिलने पर इंसान व्यथित होने लगता है। परिणामस्वरूप धीरे – धीरे अपराध की दुनिया में कदम भी रखने लगता है। यही कारण है की नशा छोटी-छोटी वारदातों से संगीन वारदातों में सहजता से बदल जाता है।

 रिपोर्ट –  निहारिका चतुर्वेदी

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