कन्या भ्रूण हत्या पाप नहीं महापाप

कन्या भ्रूण हत्या मानवता और विशेष रूप से स्त्री जाती के विरुद्ध सबसे जघन्य अपराध है। किसी गर्भवती स्त्री के गर्भ का लिंग परीक्षण जांच के बाद बालिका शिशु को हटाना ही कन्या भ्रूण हत्या है। इसकी मुख्य वजह बालक शिशु की इच्छा है। जिसके चलते बालिका शिशु के ही गर्भ में ही हत्या कर दी जाती है। वही यह सोच की लड़के अपने माता-पिता की सेवा करते है और लड़कियाँ पराया धन होती है पर “मैंने अक्सर लोगों को कहते सुना है की लड़के विवाह के बाद पराये हो जाते है पर लड़कियाँ अपनी रहती है ”

लड़के वंश चलाते है और लड़कियाँ दूसरे घर जाकर उनका वंश आगे बढ़ाएगी सोचने की बात यह है वंश चले न चले क्या फर्क पढता है जब आप ही दुनिया से चले गए तो क्या महत्त्व है वंश का सदियों से चली आ रही दहेज़ प्रथा भी कन्या भ्रूण हटाया को बढ़ावा देती है सरकार द्वारा इतने क़ानून बनाये जाने के बाद भी दहेज़ प्रथा ज्यो की त्यों चलती आ रही है जिसके चलते भारत में अभिवावक गर्भ में ही कन्या को ख़त्म कर देते है बालिका शिशु पर बालक शिशु की प्राथमिकता है क्योंकि पुत्र आय स्त्रोत का मुख्य साधन है
कन्या भ्रूण हत्या केवल छोटे शहरों और अनपढ़ लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि बड़े शहरों के पढ़े लिखें लोग इसका हिस्सा है दहेज़ देश के पढ़े लिखें समाज के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रतिक बना हुआ है लोग बड़े ही शान से इस बात का ब्याख्यान करते है की उन्हें अपने बेटे के विवाह में कितना दहेज़ मिला है एक कारण लड़की के अभिवावक पर लड़के के अभिवावक को मिलने वाला सम्मान भी है समाज द्वारा बनाई गयी कुरीतियाँ जिसने भ्रूण हत्या को दिन पर दिन बढ़ावा दिया है
लोगों की यह सोच की लड़के वंश को जारी रखते है की लड़कियाँ ही शिशु को जन्म देती है लड़के नहीं कन्या भ्रूण हत्या के कारण विवाह योग्य लड़को के लिए वधुओं की कमी के रूप में सामने आयी है जिसने
अपराध को बढ़ावा ही दिया है जिसके कारण यौन शोषण, बलात्कार जैसे अपराधों me वृद्धि हुई है कन्या भ्रूण हत्या को ख़त्म करने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाये है जैसे पिता की सम्पति मे समानता का अधिकार
लिंग जाँच करने वाले व कराने वाले को जुर्माना और निश्चित सजा लेकिन क़ानून भी कुछ नहीं कर सकता अगर लोगों मे जागरूकता नहीं होंगी लड़का , लड़की के भेद को खत्म करना होगा क्योंकि दोनों की संरचना अलग है और महत्त्व भी |

 रिपोर्ट – निहारिका चतुर्वेदी

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