एक छत के इंतजार में

संतकबीरनगर। बेलहरकलां ब्लॉक के अवराहियां मंझरिया गांव की एक गरीब विधवा महिला जिम्मेदारों की लापरवाही से आवास सहित अनेको जनकल्याणकारी योजनाओ से वंचित है। मजबूरन महिला टूटी फूटी झोपड़ी में दिन काटने को मजबूर है। महिला का नाम सुनीता है। पति की मौत के बाद से सुनीता को विधवा पेंशन दिलवाने तक के लिए जिम्मेदारों ने कोई कदम नहीं उठाया। किसी तरह से मजदूरी कर अपना तथा अपने बच्चों का पेट किसी तरह से पाल रही है। सरकार की जनकल्याणकारी सुविधाओं के अभाव में परिवार के लिए जीवन यापन करना बेहद परेशानी भरा हो गया है। जिम्मेदारों पात्रों के बजाए अपात्रों की खिदमत में लगे हुए है।

सुनीता ने बताया कि उसके पति दिनेश की आठ साल पूर्व मृत्यु हो गई थी। जब तक पति जीवित थे तब तक उनकी कमाई से ही परिवार का भरण पोषण हो रहा था। पति की मौत के बाद से आर्थिक स्थिति बदहाल हो गई है। उसे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा गया है। प्रधानमंत्री आवास के अभाव में टूटी फूटी हुए झोपड़ी में रहना मजबूरी है। बरसात के समय झोपड़ी में पानी टपकता रहता है। प्रधानमंत्री आवास व विधवा पेंशन के लिए कई बार चक्कर लगाने के बावजूद आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।

सुनीता के साथ बेटा अमित 6 वर्ष, बेटी नेहा 12 वर्ष, मोहिनी 11 वर्ष एवं चांदनी 8 वर्ष अपने बच्चों के साथ रहती है। पति की मौत के बाद खाने के लाले पड़ गए थे। मजबुरन पत्नी को मजदूरी करके बच्चों का पेट भरना पड़ रहा है।
इस बाबत सीडीओ हाकिम सिंह ने बताया कि इस विषय में मुझे कोई सूचना नहीं थी अगर 2011 की सूची में नाम होगा तो तत्काल खंड विकास अधिकारी विजय कुमार पाण्डेय को जांच करवाने के लिए कहता हू‌ं। अगर 2011 के सूची में नाम नहीं है तो आनलाईन फार्म भरवाकर कर सुनीता को सभी लाभ दिया जायेगा।

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