बीज अनुदान की होगी जांच

दिल्ली-   देश के सभी जिलों में तीन साल में दिए गए बीज अनुदान की जांच होगी। श्रावस्ती में ट्रेजरी बिल में गड़बड़ी कर लाखों रुपये हड़पने का मामला सामने आने पर यह फैसला किया गया है। जांच में कई जिलों में गड़बड़ियां मिलने की आशंका जताई जा रही है।

श्रावस्ती के उप कृषि निदेशक कार्यालय में तैनात एक वरिष्ठ सहायक ने ट्रेजरी बिल में गड़बड़ी कर 25 लाख रुपये से अधिक राशि गबन कर ली। बताते हैं कि कृषि विभाग ने ट्रेजरी के लिए जो बिल भेजे, उसमें खेल कर उसने अपने कुछ रिश्तेदारों के खाता नंबर डाल दिए। ट्रेजरी से वही बिल पास हो गए।

पात्र किसानों के खातों में अनुदान की राशि न पहुंचने पर उन्होंने हंगामा करना शुरू किया तो कृषि विभाग और ट्रेजरी के बिलों की जांच की गई। इससे यह घपला खुला। आरोपी वरिष्ठ सहायक काफी समय से श्रावस्ती में यह जिम्मेदारी संभाल रहा था, इसलिए उसके पूरे कार्यकाल के बिलों की जांच कराई जा रही है।

कुछ समय पूर्व कानपुर में भी 16.56 करोड़ रुपये का बीज घोटाला सामने आ चुका है। कृषि विभाग किसानों को सब्सिडी पर बीज देने के लिए हर साल करोड़ों रुपये का बीज उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम से खरीदता है। वित्त वर्ष 2018-19 में निगम ने कृषि विभाग को भुगतान के लिए बिल भेजे तो उनमें से चार बिल फर्जी निकले।

प्रारंभिक जांच में पाया गया कि बीज की आपूर्ति किए बिना ही भुगतान के लिए बिल भेज दिए गए थे। वर्ष 2011-12 से 2017-18 तक की आपूर्ति की जांच में 16.56 करोड़ रुपये के फर्जी बिल मिले। यानी, किसानों को बीज दिए बिना ही उसका पेमेंट ले लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि श्रावस्ती में भी यह घपला करोड़ के आंकड़े को पार करने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस गड़बड़ के पीछे अधिकारियों का भी हाथ होता है, लेकिन कानपुर और श्रावस्ती, दोनों ही जगहों पर सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। बड़ी ‘मछलियों’ को बचा दिए जाने से बीज घोटाले थम नहीं रहे हैं। किसी न किसी जिले में यह अक्सर सामने आ रहे हैं।

इस बारे में संपर्क किए जाने पर अपर निदेशक, बीज एवं प्रक्षेत्र का अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे निदेशक वीपी सिंह ने बताया कि श्रावस्ती का मामला सामने आने के बाद सभी जिलों में दिए गए बीज अनुदान की जांच कराई जा रही है। साथ ही ट्रेजरी से भी संपर्क किया जा रहा है कि वो कृषि विभाग की ओर से भेजे गए बिल को उसी रूप में ऑनलाइन स्वीकार कर ले। ऐसा होने पर ट्रेजरी बिल में खाता नंबर बदलने की गुंजाइश ही नहीं बचेगी।

रिपोर्ट – ग्राम्य संदेश डेस्क

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