जैविक खेती से परिवार को मिली नई दिशा

 रांची – हमारे पास केवल 25 डिसमिल जमीन थी। मिंट्टी खराब हो जाने से कड़ी मेहनत के बाद भी उपज नाम मात्र ही होती थी। हमारे परिवार की हालत ऐसी थी कि दो वक्त का खाना भी मुश्किल से चलता था। हमने कुछ लोगों के कर्ज भी ले रखा था। वो हमारे लिए कोढ़ में खाज के जैसी थी। फिर हमने अपने मिंट्टी की जांच रामकृष्ण मिशन के द्वारा संचालित केवीके में कराई। जहां हमें पता चला की हमारी जमीन जहरीली हो गई है। इसके बाद मैंने अपने पति छेदिश्वर बेदिया के साथ जैविक खेती की तकनीक सीखी आज हमारे खेत में फसल काफी अच्छी हो रही है। ये बातें जैविक विधि से खेती करने वाली अनगड़ा के बदरी गांव की रहने वाली कमल देवी ने कहा।

कमल देवी ने बताया कि पिछले कुछ सालों में अच्छी उपज से उन्होंने लोगों से लिए हुए कर्ज चुका दिए। इस साल उन्होंने 30 हजार रुपये की सब्जी बेची है। जैविक खेती से उपजने वाली सब्जी काफी लंबे समय तक खराब नहीं होती। रसायनिक विधि से उपजायी हुई सब्जी जैविक विधि से उपजी हुई सब्जी से देखने में भी ज्यादा फ्रेश होती है। अब हमारी सब्जी कुछ दूसरे राज्यों में भी सप्लाई होती है। व्यापारी खुद आकर इसे खरीदकर ले जाते हैं। जैविक होने के कारण व्यापारी रसायनिक के बजाए ज्यादा पैसे देते हैं।

 

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