प्राथमिक विद्यालयों में होंगे डिजिटल क्लास रूम

श्रावस्ती – अब प्राइमरी स्कूलों में भी बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा की तस्वीर बदल रही है। प्रदेश स्तर पर इस जनपद का शिक्षा का प्रतिशत सबसे नीचे होने पर जिलाधिकारी ओ0पी0 आर्य ने एक अभिनव का प्रयोग कर जिले के कई विद्यालयों में कान्वेन्ट के तर्ज पर बच्चों को शिक्षित करने का जो संचालन किया है इससे बच्चों के अभिभावकों में खुशी की लहर है और वे जिला प्रशासन के साथ-साथ प्रदेश सरकार को भी बधाई दे रहे हैं। विकासखण्ड सिरसिया के अन्तर्गत कटुकुईया निवासी योगेश ने बताया कि हमारी बेटी पहले विद्यालय जाने से डरती थी लेकिन एक दिन प्राथमिक विद्यालय कटुकुइयां में भेजा वंहा पर उसको शिक्षकों द्वारा बेहतर ढंग से कार्टून के माध्यम से पढ़ाई करवाई जिस पर वह बहुत की प्रसन्नता जाहिर की और प्रतिदिन विद्यालय जाने लगी। इसी प्रकार हरदत्त नगर गिरन्ट निवासी चन्द्रभान, मोहम्मदापुर निवासी जयराम सहित अन्य लोगों ने भी अपने बच्चों के प्रतिदिन विद्यालय जाने एवं स्मार्ट क्लास में पढ़ने से प्रसन्नता व्यक्ति की तथा कहा कि हम गरीबी के कारण अपने बच्चों को कान्वेन्ट स्कूलों में नही पढ़ा सकते थे। यह सपना जिलाधिकारी ने साकार कर दिखाया है अब हमारे बच्चे कान्वेन्ट बच्चों की तरह ही फर्राटे दार अग्रेंजी भी बोलने का अभ्यास कर रहे हैं।

जिलाधिकारी ने बताया कि देश, प्रदेश एवं समाज के विकास में शिक्षा की महती भूमिका है सभी लोक शिक्षित होगें तो निश्चित ही हमारा समाज तरक्की करेगा। यंहा के बच्चे जो अपने अभिभावकों के गरीबी और लाचारी के कारण कान्वेन्ट में अध्ययन हेतु नही जा सकते थे इन समस्याओं के मद्देनजर अब प्राइमरी स्कूलों में भी कान्वेन्ट विद्यालयों के तर्ज पर शिक्षण कार्य की व्यवस्था की जा रही है। उन्होने बताया कि अब कक्षाओं में बच्चों की पढ़ाई, पहले से ज्यादा सुविधाजनक और हाईटेक हो गई हैं। स्कूलों में ब्लैकबोर्ड के जगह प्रोजेक्टर्स, टीचर के हाथ में चॉक की जगह स्टाइलस डिवाइस और बच्चों के हाथ में पेन पेंसिल की जगह रिमोर्ट कंट्रोल आ गए हैं। ऐसे में इसे विकासशील देश में शिक्षा की नई तस्वीर कहा जा सकता है।

उन्होने बताया कि नई तकनीकी से शिक्षा ले रहे छात्राओं की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं। पढ़ाई के इस नए तरीके में बच्चों को हर चीज वीडियो, पिक्चर्स और ग्राफिक्स के जरिए समझाई जाती है। टेस्ट देने के लिए भी हाई-टेक तरीके का इस्तेमाल है। प्रोजक्टर पर प्रश्न दिखते ही छात्र रिमोर्ट के जरिए अपना जवाब देंगे और तुरंत सही, गलत का पता भी चल जाएगा। पढ़ाई का तरीका बदलने वाली ये टेक्नोलॉजी न सिर्फ बच्चों के लिए दिलचस्प है बल्कि टीचर्स के लिए आसान है।

जिलाधिकारी ने कहा कि पढ़ाई का ये नया तरीका दिलचस्प और आसान है, प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को अब पंख लगेे हैं, अभी तक जनपद में 10 प्राइमरी स्कूलों को मॉडल बनाने की कवायद की गई है फिर धीरे-धीरे सभी प्राथमिक विद्यालयों को माडल के रूप में बनाया जायेगा। उन्होने कहा कि मॉडल स्कूल में बच्चों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगीं, जो प्राइवेट कान्वेंट स्कूलों में होती हैं। क्लास रूम डिजिटल होंगे। मॉडल प्राइमरी स्कूल में रेलिग चाहरदीवारी, आधुनिक इज्जतघर, फर्श पर टाइल्स, सुसज्जित फर्नीचर, लाइब्रेरी, कंप्यूटर प्रोजेक्टर, व्हाइट या डिजिटल बोर्ड सहित अन्य व्यवस्थाओं से सुसज्जित किया गया है।

जिलाधिकारी ने बताया है कि जनपद में माडल विद्यालय क्रमशः प्राथमिक विद्यालय भिनगा प्राथम, प्राथमिक विद्यालय पाण्डेय पुरवा, प्राथमिक विद्यालय सिसवा, प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदापुर, प्राथमिक विद्यालय जमुनहा, प्राथमिक विद्यालय हरदत्त नगर गिरन्ट, प्राथमिक विद्यालय सिरसिया, प्राथमिक विद्यालय कटकुईयां, प्राथमिक विद्यालय इकौना तथा प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर को कान्वेन्ट विद्यालयों के तर्ज पर संचालित किया जा रहा है। उन्होने बताया कि जनपद के कुल 1154 विद्यालयों में से टाइल्स लगवा दिया गया तथा प्रथम चरण में अब तक 334 विद्यालयों को वाल पेन्टिंग से सुसज्जित किया जा चुका है, इसी प्रकार जनपद के सभी विद्यालयों को सुसज्जित करने की कवायद चल रही है।

रिपोर्ट- चंद्र प्रकाश शुक्ला

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