आखिर क्यों किसान का बेटा नहीं बनना चाहता किसान ?

लखनऊ – पुराने जमाने में खेती को सबसे उत्तम धंधा माना जाता था। समय के साथ लोगों की सोच बदली और आज खेती को सबसे निम्न धंधा माना जाता है। स्थिति ये है कि आज का युवा खेती करना ही नहीं चाहता। वो बाहर जाकर गार्ड की नौकरी करना पसंद करेगा मगर खेती नहीं। क्या कभी सोचा है आप लोगों ने कि आखिर क्यो आज का युवा खेती से भाग रहा है, जबकि किसान को अन्नदाता कहा जाता है। दरअसल कहने के लिए किसान के बारे में कुछ लोग बहुत अच्छे – अच्छे विचार रखते हैं ,पर वे भी किसानों के हित के लिए कुछ खास नहीं कर पाते।

दरअसल मुझे लगता है की किसानों की दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए ही आज का युवा खेती नहीं करना चाहता। आज की तारीख में किसानों की स्थिति ये है कि हर किसान के घर में साल भर खाने को अन्न तक नहीं मिल पायेगा। उसके बच्चे कान्वेंट में नहीं पढ़ सकते, उसका इलाज बढ़िया अस्पताल में नहीं हो सकता। मेरे ख्याल से इसके कई कारण हो सकते हैं। किसानों की इस दुर्दशा के लिए किसान तो उत्तरदायी हैं ही, सरकार भी कुछ कम नहीं है। मैं तो कहूंगा कि सरकार का ही ज्यादा दोष है।

किसान अपना सब कुछ दाव पर लगाकर फसल उपजाता है। वही फसल जब पक कर तैयार हो जाती है, तो किसान को उसका उचित दाम नहीं मिल पाता। बीच के बिचौलिए सारा मज़ा मार लेते हैं। सरकार को हर जिले, तहसील में भंडारण कि व्यवस्था करनी चाहिए ताकि उचित समय आने पर ही किसान अपने अनाज को बेचे ताकि उसे फसल की उचित कीमत मिल सके। किसान एक ही तरफ से नहीं मारा जा रहा। प्रकृति भी उसके साथ खूब मजाक करती है। किसान की फसल कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि से नष्ट हो जाती है। सरकार को इस स्थिति का ध्यान रखते हुए इसके लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए।

दुर्भाग्य की बात ये है कि किसान जो भी अन्न उपजाता है। भंडारण की सुविधा न मिलने के कारण जल्दबाजी में उसे औने पौने दामों पर बेचना पड़ता है। किसान के फसल को व्यापारी लोग कम दाम में खरीद लेते हैं और स्वयं मनचाही दामों पर बेचते हैं। सरकार को किसानों के लिए भंडारण की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।

नोट – यह लेख हमें हमारे संवादाता गंगेश्वर यादव ने संत कबीर नगर से भेजा है। कृषि और ग्राम्य परिवेश के मुद्दों पर चिंतन और मंथन को आप भी अपने शब्दों में लिखकर हमें हमारे पते gramyasandesh@gmail.com पर भेज सकते हैं।

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