डायबिटिक न्यूरोपैथी पर हुए रिसर्च में सामने आए महत्वपूर्ण तथ्य

सैफई। क्षेत्र के डायबिटीज के मरीजों में डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारणों पर सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय के मेडिसिन विभाग में हुए शोध से यह प्रमाणित हुआ है कि उनमें विटामिन डी की कमी न्यूरोपैथी का एक प्रमुख कारण है।  सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ प्रो. राजकुमार, जो कि एक विश्वविख्यात न्यूरो सर्जन हैं, ने बताया कि लगभग 50 प्रतिशत डायबिटीज के मरीजों में न्यूरोपैथी (पैरों व हाथों में दर्द, झनझनाहट, ऐठन, सुई सी चुभन) के लक्षण देखे गए हैं। इसका मुख्य कारण अनियंत्रित ब्लड शुगर, अनियंत्रित कोलेस्ट्रॉल, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर इत्यादि हैं। हाल के वर्षों में हुई रिसर्च के अनुसार अगर डायबिटीज के मरीज में विटामिन डी का स्तर कम हो तो न्यूरोपैथी की संभावना बढ़ जाती है। क्योंकि विटामिन डी शरीर की नसों में बनने वाली ऊपरी सतह न्यूरिलेमा के बनने में सहायक होने के साथ कैल्शियम की भी पूर्ति नसों में करवाने में सहायक है एवं शरीर में इंसुलिन के खिलाफ बनने वाली प्रतिशोधक क्षमता को भी कम करता है। इसी विषय पर सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय में हुए शोध कार्य से क्षेत्र के डायबिटीज के मरीजों में इस तथ्य की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि इससे क्षेत्र के मरीजों में व्याप्त डायबिटिक न्यूरोपैथी के इलाज में बड़ी सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में शोध कार्यों पर काफी महत्व दिया जा रहा है जिसके सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं।

शोधकर्ता एवं मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सुशील कुमार ने बताया कि इस शोध में मेडिसिन विभाग की ओपीडी से कुल 55 मरीजों को शामिल किया गया जिन्हें दो भागों में बांटा गया। 35 मरीज जिनका ब्लड शुगर अनियंत्रित था एवं न्यूरोपैथी के लक्षण मौजूद थे, 20 मरीज ऐसे थे जिनका ब्लड शुगर नियंत्रित होने के साथ-साथ के लक्षण मौजूद नहीं थे। अब सभी मरीजों के रक्त की जांच में यह पाया गया कि जिन मरीजों में न्यूरोपैथी के लक्षण थे उनमें विटामिन डी का स्तर काफी कम था और जिनमें न्यूरोपैथी नहीं थी उनमें विटामिन डी का लेवल नॉर्मल था। यह भी पाया गया कि महिलाओं में न्यूरोपैथी के लक्षण पुरुष मरीजों की तुलना में ज्यादा थे तथा विटामिन डी का स्तर भी कम था। अतः इस रिसर्च से यह प्रमाणित हुआ कि डायबिटीज के मरीजों को उचित मात्रा में विटामिन डी का स्तर रखना चाहिए।

डॉ सुशील कुमार ने बताया कि इस रिसर्च वर्क को उन्होंने हाल ही में उत्तर प्रदेश डायबिटीज एसोसिएशन के आगरा में आयोजित ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया। इस कांफ्रेंस की थीम ‘‘डायबिटीज रिवर्सल‘‘ थी और ऐसे उपायों पर विचार प्रस्तुत किए गए जिनसे बिना मेडिसिन खाए डायबिटीज का प्रत्यावर्तन किया जा सके जैसे कि वजन कम करके, व्यायाम करके, खानपान एवं जीवन शैली में बदलाव करके। इस कॉन्फ्रेंस में विटामिन डी की कमी को पूर्ण कर न्यूरोपैथी के रिवर्सल की संभावनाओं पर चर्चा हुई और सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय के इस महत्वपूर्ण शोधकार्य की सराहना हुई।

इस उपलब्धि पर कुलपति डॉ प्रो राजकुमार, प्रति कुलपति डॉ रमाकांत यादव, कुलसचिव सुरेश चंद्र शर्मा, संकाय अध्यक्ष डॉ आलोक कुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ आदेश कुमार और सभी विभागों के फैकल्टी ने डॉक्टर सुशील कुमार एवं मेडिसिन विभाग को बधाई दी।

शरीर में विटामिन डी की कमी के लक्षण-

  • अत्यधिक थकान
  • हड्डियों व मांसपेशियों में दर्द
  • बाल झड़ना
  • घाव भरने में ज्यादा समय लगना
  • कमर व पीठ में दर्द
  • मानसिक तनाव रहना

शरीर में विटामिन डी की कमी के कारण –

  • ऐसी जगह रहना जहां धूप कम हो
  • आहार में विटामिन डी की कमी होना
  • जरूरत से ज्यादा सनस्क्रीन क्रीम लगाने से सूर्य की किरणों का त्वचा तक नहीं पहुंच पाना
  • अधिक प्रदूषण से

    शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा करने के उपाय-

  • प्रतिदिन 10 से 30 मिनट की धूप का सेवन (सुबह 10ः00 से 2ः00 बजे तक)
  • विटामिन डी की मात्रा से परिपूर्ण आहार जैसे कि दूध, दही, अंडे की सफेदी, टूना मछली, सोया मिल्क, मशरूम, अंकुरित गेहूं व चने, संतरे का जूस, मखाने इत्यादि का सेवन करें।
  • विटामिन डी सप्लीमेंट से भी कमी को पूरा कर सकते हैं।

रिपोर्ट
सुनील कुमार

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