बीड़ी, सिगरेट के अलावा इस वजह से भी होती है सांस की बीमारी

आमतौर पर माना जाता है कि सांस की बीमारी सिगरेट, बीड़ी पीने से होती है। पर, पिछले डेढ़ साल में हुए शोध के मुताबिक बिना धूम्रपान करने वालों को भी यह गंभीर बीमारी हो रही है। घर से ही सांस की बीमारी पनप रही है। घरों में लगने वाले परदों, सोफे, कालीन, टैडी बियर, हर्बल अगरबत्ती, धूपबत्ती, मच्छर भगाने की क्वायल आदि से बीमारी बढ़ी है। यह जानकारी रविवार को केजीएमयू पल्मोनरी एवं रेस्परेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने दी।

इंडियन चेस्ट सोसायटी यूपी चैप्टर और नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन की ओर से बेस्ट ऑफ चेस्ट 2018-19 सेमिनार हुआ। होटल ताज में यूपी, बिहार, उत्तराखंड से करीब 250 डॉक्टर शामिल हुए। प्रमुख वक्ताओं में हैदराबाद से वी. नागार्जुन मतरू, पुणे से डॉ. नितिन अभयंकर, जयपुर से डॉ. वीरेंद्र सिंह, कानपुर से डॉ. सुधीर चौधरी, बीएचयू से डॉ. जेके सावरिया, मुंबई से डॉ. अमिता नेने, एम्स दिल्ली से डॉ. करन मदान, डॉ. खुशबू पिलानिया रहीं।

जांच की बारीकी जानेंगे डॉक्टर
डॉ. सूर्यकांत ने बताया शोध में सीओपीडी, अस्थमा, फेफड़े की झिल्ली (प्ल्यूरा), आईएलडी, टीबी आदि की जांच, सीटी रेडियो डॉयग्नोसिस टेक्नीशियन करता है। अब सांस के डॉक्टर भी सीटी व जांच की बारीकी सीखेंगे क्योंकि डॉक्टर मरीज का इलाज करता है।

मिडलैंड के डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि पांच करोड़ लोग सीओपीडी (क्रॉनिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज) से बीमार हैं। इनमें 15 लाख लोग हर साल विश्व और भारत में करीब पांच लाख लोग मरते हैं। इससे 18 गुना अधिक निमोनिया होने का खतरा होता है। भारत में अस्थमा से तीन करोड़ लोग पीड़ित हैं।

ग्राम्य संदेश डेस्क

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