मैं भी कभी प्रवासी था : सोनू सूद

लॉकडाउन से दिहाड़ी मजदूरों के पास काम नहीं है और काम के बिना उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद इन मजदूरों की मदद के लिए आगे आए। सोनू ने अब तक मुंबई से कई हजार प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाया है। सोनू ने इन मजदूरों के लिए बसों का इंतजाम करके सभी को उनके घर भेजा। सिर्फ इतना ही नहीं, सोनू ने उन मजदूरों के लिए खाना भी भिजवाया ताकि मजदूर खाली पेट सफर ना करें।

हाल ही में जब सोनू सूद से पूछा गया कि मजदूरों को घर भेजने में एक बस का कितना खर्च आता है तो उन्होंने बताया कि इसमें 1.8 लाख से लेकर 2 लाख तक का खर्च आता है। यह इस पर भी निर्भर करता है कि प्रवासी को कहां जाना है।

एक इन्टरव्यू में सोनू सूद ने बताया कि, ‘मैं प्रवासी मजदूरों की मदद इसलिए कर रहा हूं कि क्योंकि मैं भी कभी प्रवासी था, जो अपनी आंखों में ढेर सारे सपने लेकर मुंबई आया था। मुझे तस्वीरों से पता चला कि वे कितनी परेशानी से गुजर रहे हैं। वे बिना खाना और पानी के हजारों किलोमीटर सड़कों पर पैदल चले जा रहा है तो मुझे अपने शुरुआती दिनों की याद आ गई। मैं पहली बार मुंबई बिना आरक्षित टिकट के ट्रेन से आया था। मैं ट्रेन के दरवाजे पर खड़े होकर और वॉशरूम के बगल में सोकर मुंबई पहुंचा था। मुझे पता है कि संघर्ष क्या चीज होती है।’

सोनू सूद और उनकी टीम ने बसों के माध्यम से हजारों मजदूरों को मुंबई से कर्नाटक राजस्थान, झारखंड, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश और बिहार तक भेजा है और यह काम अभी भी जारी है।

बेटे को दिया अभिनेता का नाम

हाल ही में सोनू सूद ने दरभंगा के कुछ प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाया जिनमें से एक गर्भवती महिला भी शामिल थीं। उस महिला को बेटा हुआ है जिसका नाम सोनू सूद रखा गया है। सोनू ने बताया कि, ‘मैंने उनसे मजाक में पूछा कि बेटे का नाम तो सोनू श्रीवास्तव होना चाहिए। तो उन्होंने कहा कि नहीं हमने बेटे का नाम सोनू सूद श्रीवास्तव रखा है। उनके ऐसा कहने से मेरा दिल खुश हो गया।’

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