चौपाल लगाकर डीएम ने सुनी चकबंदी की शिकायतें

गोरखपुर। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने शुक्रवार को ब्रह्मपुर ब्लॉक के जंगल रसूलपुर नंबर दो में चौपाल लगाकर चकबंदी से जुड़ी शिकायतें सुनीं। गांव में हो रही चकबंदी से ज्यादातर काश्तकार असंतुष्ट हैं। उन्होंने 19 जून को दो दिवसीय दौरे पर शहर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इसकी शिकायत की थी। यह भी आरोप लगाया था कि गांव के ही कुछ दबंग, चकबंदी अधिकारियों के साथ मिलकर दूसरों की जमीन कब्जा रहे हैं।मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही डीएम खुद गांव पहुंचे और कई काश्तकारों से बात की।
डीएम ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि गांव में वर्ष 1993 में चकबंदी की घोषणा हुई थी।

वर्ष 2013 में चकबंदी प्रक्रिया रोक दी गई थी और फिर उसी साल के अंत में शुरू हो गई। गांव काफी बड़ा है, जिससे चकबंदी के दौरान कुछ दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि जो लोग चकबंदी से असंतुष्ट हैं उनके मामलों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। साथ ही दबंगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। विभाग की गड़बड़ी मिली तो संबंधित अफसरों पर भी कार्रवाई होगी।

चौपाल के दौरान काश्तकार जनार्दन, बलिराम मौर्य, श्रीकांत, एकमला देवी, राजकुमार सहित 20 से अधिक लोगों ने डीएम के सामने अपना पक्ष रखा। कुछ की शिकायतें गलत भी मिलीं। बलराम मौर्य के प्रकरण में डीएम का कहना था कि उन्हें उनके मूल पर चक मिला है जबकि उनका कहना था कि नक्शा और कागजात की मिलान कर ली जाए। हालांकि डीएम को कुछ संदेह होने पर कहा कि शराब पीकर मत आया करो। इसके बाद तो हरकत में आए सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें वहां से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

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