पौधरोपण

श्वेता श्रीवास्तव

आज पर्यावरण सुरक्षा को देखते हुए शिक्षा विभाग अंतर्गत बी०आर०सी० के प्रांगण में श्रीमान खण्ड शिक्षा अधिकारी महोदय की अध्यक्षता में वृक्षारोपण के कार्यक्रम का आयोजन किया गयासभी न्याय पंचायत समन्वयक के साथ कुछ प्रधानाध्यापकों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। सभी कार्यक्रम सकुशल सम्पन्न हो गए मीडिया में भी खबर छापने की न्यूज़ बनाई गई अब कल अखबार में आज के कार्यक्रम की खबर और फोटोग्राफ्स भी आएगी

लेकिन………..

अब बार बार मनःस्थिति कुछ ऐसी हो रही थी कि हंसी भी आ रही थी और तीव्र गति में पीड़ा होती हुई महसूस हो रही थी….
आज के कार्यक्रम के लिए नर्सरी से 20 पौधे मंगवाये गए थे ये सभी हरे भरे पौधे नर्सरीमें खुशी से झूम रहे थे क्योंकि आज वो दिन आ गया था जब उनको जड़ में लगी थोड़ी सी मिट्टी की जगह उनका भाग्य स्कूल की जमीन पर, पूरी धरती माँ की गोद में उन्हें अपनी जड़ो को फैलाने अपना भोजन बनाने, खुद को बड़ा करने ,उसे पुष्पित -पल्लवित होने का मौका मिल रहा था ,क्यों न खुश हों वे पौधे …जिनको दुनिया देखने का आज पहली बार मौका मिल रहा था बात भी खुशी की थी लेकिन…..

वहीं बगल में लगा नीम का पेड़ आज बहुत दुखी दिखाई दे रहा था इन नन्हे मुन्ने पौधों की खिलखिलाहट सुनने की आदत जो हो गयी थी आपस में कोई विवाद होने पर बड़ा होने के कारण सभी पौधे अपनी बात नीम से कहते और वो नीम बड़प्पन से सही गलत का मार्गदर्शन कर के उनके विवाद सुलझाने के लिए हमेशा तैयार रहता था परंतु आज नीम के पौधे के दुःख की कोई सीमा नहीं थी जाने क्यों उसका कलेजा आज मुँह को आ रहा था सभी नन्हे पौधे हंसी खुशी तैयार हो रहे थे हँस बोलकर अपनी खुशी का इज़हार कर रहे थे सभी नन्हे पौधों ने नीम के पौधे को दुःखी न होने का आग्रह किया और बाकी बचे नर्सरी के पौधों को भी आश्वासन दिया कि देखना कुछ दिनों बाद तुम्हें भी थोड़ी सी मिट्टी में नहीं बल्कि जिस तरह से आज हमें धरती माँ की गोद मिल रही खुला आसमान मिल रहा है तुम्हारे भी अच्छे दिन आएंगे तुमको भी ये सब कुछ मिलेगा धैर्य रखो …देखो बरसात का मौसम चल रहा है अब लोग पेड़ लगाते हैं और सरकार द्वारा भी वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया जा रहा है और अब तो कई राष्ट्रीय पर्व भी आने वाले हैं जिसमें तुम्हें भी यहां से बाहर निकलने का मौका मिलेगा जो आज हमारे भाग्य से हमें मिलने रहा है रिक्शे वाला आया और इन सभी 20 पौधों को संभालकर रिक्शा में रखा इन नन्हे पौधों ने बाकी बचे पौधों से अलविदा कहा और नीम के पौधे को अश्रुपूरित निगाहों से जो इन नन्हे पौधों को देख रहा था प्यार देकर विदा लिया चमेली का नन्हा पौधा बोला तुम चिंता मत करो जब भी हवा चलेगी न तब मैं आपसे मिलने हवा के झोंको के साथ साथ आऊंगी……

सभी पौधे हंसते ,मुस्कुराते बतियाते हुए कब स्कूल पहुंच गए पता ही नहीं चला सब प्रांगण में एकत्रित कर के रखे गए कुछ कार्यक्रम के बाद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने पौधे को उनकी जमीन दी, पानी भी दिया, खूब फोटोग्राफ्स खिंचे ,अगले दिन अखबार में खबर भी छपी सभी बीसों पौधे साथ साथ में बहुत खुश थे कि अब वो एक साथ मिलकर छोटी सी बगिया बना लेंगे लेकिन अपने नीम की भी बहुत याद कर रहे थे…

अरे ये क्या……

अभी तो 3 ही दिन बीते थे गांव के छुट्टा घुमन्तू जानवरों ने आकर उनकी पत्तियां ही चबा डाली अब तो सब पेड़ लकड़ी की डंडी में परिवर्तित हो गए उन्हें एहसास हुआ कि शायद नीम का पेड़ इसीलिए दुःखी था हमारी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर…..

पेड़ लगाना शाबाशी का काम नहीं है शाबाशी का काम है पहले उनकी सुरक्षा व्यवस्था करना जो शायद हम करना भूल जाते हैं और इतने लाख पौधे लगने का लक्ष्य भी पूरा हो जाता है बस सिर्फ और सिर्फ कागज़ में…….

लक्ष्य पूरा होता है या कत्ल हो जाता है नर्सरी के हंसते खिलखिलाते ,मुस्कुराते, पौधों का….

यही सोचकर मन व्यथित है आज ……..

Facebook
Twitter
YouTube
LinkedIn